अब अजमेर दरगाह को लेकर हुए हि’न्दू मंदिर होने के दावे, दीवारों और खिड़कियों पर चिन्ह

इन दिनों भारत में एक न ई लहर या युं कहे कि देशभर में साम्प्रदायिक तनाव करवाने की कोशिश की जा रही है जगह जगह मस्जिदो तथा विभिन्न क्षेत्रों पर मंदिर होने का दावा किया जा रहा है हाल फिलहाल अजमेर की सुप्रसिद्ध दरगाह ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह के बारे में है जहां सभी घर्मो के लोग आते हैं भारत से ही नहीं पुरै विश्व से आते हैं ।

ऐसे में एक हिंदू शादी संगठन महाराणा प्रताप सेना ने ये दावा किया है कि अजमेर स्थित हजरत मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में मंदिर है जिसके लिए उसने पुरातत्व विभाग से भी गुजारिश किया  कि वो इसकी जांच पड़ताल करें। जहां इस संगठन की मांग है कि इस दरगाह पर की जांच पुरातत्व विभाग करे तो वहीं दरगाह के खादिमों ने ये बात कही है कि ये दावे सरासर ग़लत है और वो इसे खारिज करते हैं।जबकि याचिकर्ता परमार ने कहा कि ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह पुर्व में एक प्राचीन मंदिर था,उसके दिवारो पर अब तक सभी प्रकार के निशान मौजूद हैं ‌इसलिए वो एएसआई से इस दरगाह की जांच चाहते हैं ।तो खादिम कमेटी अंजुमन सैयद जादगान ने अपने पक्ष रखते हुए कहा कि ये सभी बातें निराघार है । क्योंकि दरगाह में इस तरह के निशान नहीं है । उन्होंने कहा कि करोड़ों लोग मैं दरगाह आते  है चाहे वो किसी भी घर्म से ताल्लुक रखते हो। उन्होंने आगे कहा देश मैं अजीब माहौल है जो पहलै कभी नहीं था,मैं दरगाह 850 वर्षो  से रहा है इसमै किसी तरह का स्वास्तिक नहीं है इसकी जिम्मेदारी मैं खुद लेता हूँ। आज जिस तरह मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह पर सवाल उठाया जा रहा है उससे लाखों करोड़ों लोगों की भावनाओं पर ठेस पहुंचा है वो देश में शांति चाहते हैं लेकिन देश में सोहार्द को बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। जिसकी जवाब देही सरकार की है। सरकार को अपनी जिम्मेदारी लेनी होगी।

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