गरुड़ पुराण के मुताबिक, यह 5 आदतें धकेलती हैं गरीबी की तरफ, कभी भूलकर भी ऐसा ना करें

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि इस हालात में आज कल हर कोई पैसे की तंगी से परेशान है। कमोबेश हर किसी के साथ इस तरह की कुछ न कुछ दिक्कत पेश आ रही है। ऐसे में ज़ाहिर सी बात है कि हर कोई ज्यादा पैसा कमाना चाहता है। वहीँ वह तरह तरह के टोटके भी आजमाने लगता ।है लेकिन क्या आप जानते हैं ग्रहों के दोष, दशा फिर गलत कामों के कारण भी दुख भोगते हैं। ‌

कुडली में मौजूद गृह किसी ना किसी तरह से व्यक्ति के जीवन में अच्छा या बुरा असर डालते हैं। आईए जानते हैं आखिर कैसे बनता है घन का योग। आज हम आपको इसके बारे में बताने जा रहे हैं। दर असल ज्योतिष शास्त्र के माने तो घन कमाने की सबसे ज्यादा इच्छा शुक्र, मंगल, चंद्र और सुर्य की राशियों का होता है। शुक्र की राशि वृषभ, मंगल की राशि वृश्चिक, सुर्य की सिंहऔर चंद्र की कर्क राशि के जातकों की सबसे ज्यादा घन कमाने की लालसा होती है। वहीँ कुंडली में घन का भाव होना बहुत जरूरी है। घन का हसीं दुसरे और आठवें भाव से होता है। इस भाव में वृषभ और वृश्चिक राशि राज करती है। अगर किसी जातक की कुंडली में सातवें भाव में मंगल या फिर शान्ति बैठा है तो जान ले वो ग़लत तरीके से पैसे कमाएगा जेसे जुआ, दलाली वगैरह।इसके अलावा अगर चंद्रमा और मंगल एक साथ किसी भाव में मौजूद हैं। ये चंद्र मंगल कि योग मनाते हैं। जो घन का योग दर्शाता है। अगर किसी जातक की कुंडली में मंगल शुक्र के साथ युग्म में स्थित है तो इन्हें स्त्री पक्ष की ओर से घन लाभ मिलेगा। अगर कुंडली में गुरु दसवें या फिर ग्यारहवें भाव में हो तो प्रशास निक क्षमताओं के द्वारा घन का लाभ होगा।

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